Wednesday, February 10, 2016

कुछ पाने  की शिकायत आज है हमे कुछ खोने की भी शिकायत आज है|
तुझे  न बताने की शिकायत आज है हमे तेरे छिपाने की भी शिकायत आज है|
तेरे इश्क में रहना, मिलना, बिछड़ना वो लम्हा क्या कुछ और था?
या यूँ ही गुज़रना था जिसे एक दिन कभी वही गुज़रता हुआ दौर था|
मेरी हंसती  ज़िन्दगी को बर्बाद करने तेरे आने की शिकायत आज है,
और बस यूँ ही बर्बाद करके तेरे चले जाने की भी शिकायत आज है|
तेरे सारे वादों के तेरी खुद की बातों से ही कितने बैर निकले,
जो सपने तेरी ही आँखों से चुने थे वे  तेरे ही कितने गैर निकले|
कुछ हसीं यादों को और तेरे सारे ग़मों को तेरे संग ही भूलाने की शिकायत आज है|
पर हमे बिन तेरे और बिन तेरी यादों के यूँ मुस्कुराने की भी शिकायत आज है|

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