रात ख्वाब में आते हैं जो पल चाहत के,
उन्हे ख्वाब से छूट कर निकल जाने दे|
बड़े देर से कैद है जो उस पल की हसरत,
उसे वक्त से छूट कर इस पल आने दे|
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उन्हे ख्वाब से छूट कर निकल जाने दे|
बड़े देर से कैद है जो उस पल की हसरत,
उसे वक्त से छूट कर इस पल आने दे|
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बड़े वक्त तक जला ये सूरज
भी तेरी खातिर,
और बची लपटें भी आखिर यूँ ही जल गयीं |
बड़े वक्त तक रोका हसीं शाम भी तेरी खातिर,
पर बिन तेरे आज भी ये तन्हा ही ढल गयी |
और बची लपटें भी आखिर यूँ ही जल गयीं |
बड़े वक्त तक रोका हसीं शाम भी तेरी खातिर,
पर बिन तेरे आज भी ये तन्हा ही ढल गयी |
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दर्द तो वही था, ज़ख्म कुछ नया था कुछ पूराना था|
जो सच था हमे मंजूर न था, और बाकि सब तेरा बहाना था|
कोशिश तो थी कि सारे राज बोल दूं तुम्हे तब,
पर जो हँसता देख लिया तुमको ,तो सब दिल मे ही छुपाना था|
जो सच था हमे मंजूर न था, और बाकि सब तेरा बहाना था|
कोशिश तो थी कि सारे राज बोल दूं तुम्हे तब,
पर जो हँसता देख लिया तुमको ,तो सब दिल मे ही छुपाना था|
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तेरे जुर्म में मै भी शामिल हो जाऊँ,
फिर देखुं की क्या सजा हासिल होगी?
मुश्किल थी तेरी बेवफई अब तक,
तो क्या तेरी वफा भी मुश्किल होगी?
फिर देखुं की क्या सजा हासिल होगी?
मुश्किल थी तेरी बेवफई अब तक,
तो क्या तेरी वफा भी मुश्किल होगी?
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उन हवाओं को मैं पहचानता हूँ जो तुम्हे छूकर आती हैं|
गर शिकायत हो तो कैद कर लेना बंद कमरे मे खुद को,
क्योंकि तेरे हर पल का हाल वो मुझे ही आकर सुनाती हैं|
गर शिकायत हो तो कैद कर लेना बंद कमरे मे खुद को,
क्योंकि तेरे हर पल का हाल वो मुझे ही आकर सुनाती हैं|
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मेरी खामोश चाहत की आखिरी हद भी, बस तेरी इक आवाज़ तक है|
फिर भी मैं बेकरार कई ज़माने से हूँ, और तू बेखबर आज़ तक है|
फिर भी मैं बेकरार कई ज़माने से हूँ, और तू बेखबर आज़ तक है|
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