Wednesday, February 10, 2016

आज सफर में बैठे सोच रहा हूँ,
काश ज़िंदगी भी इतनी ही तेज चलती|
कुछ ज़रुरी पड़ावों पे रुकती,
 कुछ ऐसे ही पार कर जाती|
बेशक कुछ पड़ाव खुशी के आते कुछ गम के
पर हमे वक्त कहाँ मिलता इतना सोचने का|
फिर ज़िंदगी कितनी आसान हो जाती....
फिर सोचता हूँ यार ज़िंदगी ऐसी ही होती,
तो किसी पिक्चर की कहानी हो जाती|
कुछ दिन पर्दे पे चलती,
फिर हम भूल जाते फिर पूरानी हो जाती|

No comments:

Post a Comment